फैशन की दुनिया में दर्पण कढ़ाई ने ले लिया है नया रुप
अबला कढ़ाई की उत्पत्ति भारत देश के गुजरात शहर से शुरू हुई थी। वहां के लोग बड़े शौक से अपने कपड़े और जरूरत पर सजावटी सामानों पर यह कढ़ाई करते थे। फिर धीरे-धीरे करके पूरे विश्व में फैलती गया। एक समय में जो लोगों की पसंद था अब वह फैशन हब में भी प्रवेश कर चुका है।यह फैशन का एक हिस्सा बन गया है जो आज भी विश्व प्रसिद्ध है।
अबला कढ़ाई में कांच या प्लास्टिक के प्रतिबिंब टुकड़ों को गोल, चौकोर व त्रिकोण आकार में कटे हुए बाजार में उपलब्ध होते हैं। फेविकोल के माध्यम से कपड़ों पर इसे चिपकाया जाता है फिर रेशम ऊनी व अनेक फैंसी धागों के माध्यम से कपड़ों पर अबला के चारों ओर कढ़ाई की जाती है। फैंसी धागे भी कई किस्म के आती हैं। इनकी वैरायटी और कलर में विभिन्नता पाई जाती है। जिनसे अबला कढ़ाई की जाती है यह कपड़े के अलावा बहुत सी चीजें ऐसे हैं जिन पर इन से कढ़ाई की जाती है जो इस प्रकार हैं।
दर्पण कढ़ाई किया हुआ मेज व कुर्सियां
आज के समय में हर किसी को मेज में कुर्सियों का नाम सुनते ही दिमाग में वही ख्याल आता है जो उसने देखा हो। आमतौर पर खाने की मेज और कुर्सियां लकड़ी, प्लास्टिक व स्टील की बनी होती है। जो काफी मजबूत व टिकाऊ भी होती है। पर क्या कभी किसी ने सोचा है कि उन्हीं मेज और कुर्सियों पर दर्पण का काम भी किया जा सकता है या ऐसे मेजो कुर्सियां उपलब्ध जिस पर दर्पण और ऊनी धागे द्वारा कढ़ाई की गई हो? नहीं ना।
तो देखिए इस मेज व कुर्सी पर जिस तरह से दर्पण का काम किया गया है और जिस तरह से सजाया गया है। वाकई काबिले-तारीफ है। इसकी खूबसूरती देखने लायक है। आखिर सादगी वाली जगह भी खूबसूरत चीजों से ही तो खूबसूरत बनती है। भारत में ऐसी भी बहुत सी चीजें और स्थल मौजूद है शायद ही कभी किसी ने देखें हो।भारत में ऐसे भी कई कारीगर मौजूद है इससे कई बेहतरीन कलाएं अपने अंदर रखते हैं।
अबला कढ़ाई से बना चादर
हर घर में सूती व काटन की चादर का इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि यह बहुत आरामदायक होते हैं। परंतु कुछ लोग साज सजावट को लेकर बहुत ही शौकीन होते हैं। चादर पर इसमें फैंसी धागों से कढ़ाई करते हैं, खूबसूरत डिजाइनो में अबला व दर्पण कढ़ाई करते हैं।
वैसे तो बाजारों में प्रिंटेड और कढ़ाई बने चादर विभिन्न प्रकार के डिजाइनो में उपलब्ध होते हैं। परंतु गांव कस्बा में ऐसी चादरें हाथों द्वारा बनाई जाती है।
अबला कढ़ाई किया हुआ पर्दा
पर्दे के बिना हर घर और कमरा सुना सुना लगता है। पर्दा घर की सिर्फ खूबसूरती ही नहीं बढ़ाता बल्कि सूरज की धूप किरणों से सुरक्षा करता है। पर्दे कई किस्म के होते हैं यह तो हर कोई जानता है और अब तो बाजारों में ही रेडिमेड पर पर्दे मिलने लगे हैं जिससे घर पर पर्दे न सिलने की जरूरत पड़ती है बस मनचाहा पर्दा खरीदकर लगाना रहता है।
लोग अपने साथ-साथ घर के अंदाज को भी समय-समय पर बदलते रहते हैं। लोग अपने शौक व रूचि के अनुसार घर की चीजो के साथ-साथ पर्दों को भी बदलते रहते हैं। कुछ लोग पर्दो पर गोटा, लेंस व रेशमी कढ़ाई करते हैं। उन्हें अनोखा बनाते हैं उन पर दर्पण कढ़ाई कर उन्हें खिड़की व दरवाजे पर लगाते हैं।
अबला से बना तकिये का आवरण
अपने कमरे को खूबसूरत चीजों से सजाना हर किसी का शौक होता है। हर कोई बहुत दिलचस्पी से अपने घर के सभी की कमरे को सजाने के लिए तरह-तरह की खूबसूरत चीजें खरीदता है।

समय जितने आधुनिक होता जा रहा है उतना ही जमाने के साथ-सथ हर चीज नई होती जा रही है। आज के दौर में हर व्यक्ति को रेडीमेड ऐसे ही कंफर्टेबल लगती है। हर एक चीज के साथ-साथ डोर मेट भी रेडीमेड मिलने लगे हैं।जो देखने में तो खूबसूरत लगते ही साथ ही बहुत ही आरामदायक और मुलायम होते हैं।
रही बात अबला से बनी डोर मेट की तो वह ज्यादातर गांव में और कस्बो में देखने को मिलता है वहां की औरतें अपने हाथों से डोर मेट पर अबला व विभिन्न तरह की धागों से कढ़ाई करती है और दरवाजे पर सजाती है यह घर की सफाई के साथ-साथ उस दरवाजे की खूबसूरती को भी बढाता है। घर की आवश्यकता के साथ छोटी बड़ी गांव से निकलकर यह धीरे-धीरे शहरों में भी फैशन का रूप ले चुका है।
दिवार हैंगिंग
अपने घर के शादी और सिंपल दीवारों को सजाने के लिए वॉल हैंगिंग की जरूरत पड़ती है पुराने जमाने से लेकर अब तक लोग वॉल हैंगिंग को दीवारों पर लगाते हैं जिससे दीवारें खूबसूरत दिखाई दे। यूं तो दीवार पर लटकाने अथवा सजाने के लिए बहुत किस्म की रेडीमेड अनेक चीजों से बनी खूबसूरत वॉल हैंगिंग बाजारों में सस्ती महंगी पर लोकल कई किस्म की वैरायटी उपलब्ध है।
परंतु अबला से बनाया हुआ वॉल हैंगिंग बहुत ही कम घरों में देखने को मिलता है। बाजार में यहां हर जहां उपलब्ध नहीं होता परंतु बहुत से लोग इतने शौकीन व हुनर वाले होते हैं कि वह अपने हाथों से तरह-तरह के वॉल हैंगिंग बनाकर अपने घर के दीवारों को सजाते हैं। रेडीमेड वॉल हैंगिंग की तरह यह भी वॉल हैंगिंग बहुत ही खूबसूरत लगती है इसके आकार बनावट और रंग सभी में विभिन्नता पाई जाती है। अबला से बना यहां वॉल हैंगिंग भारत के अनेक शहरों व गांव के विभिन्न घरों के अलावा कहीं भी देखने को नहीं मिलता।
जैसे-जसे हर फैशनेबल चीज में बदलाव आ रहा है। ठीक है उसी तरह कपड़ों पर होने वाली कढ़ाई से बने डिजाइन और उसके स्टाइल में भी परिवर्तन आ रहे है। पहले की डिजाइन और धागो में अब के मुकाबले बहुत ज्यादा फर्क है लोगों को सोच पहले से ज्यादा बदल चुकी है उनकी क्रिएटिविटी, विचार और कल्पनाएं कितना नवीन हो चुकी है यह हमें हर जगह देखने को मिलता है। यह सभी चीजें आधुनिकता का प्रतीक है।
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