बदलते मौसम में बच्चों के उबटन में किस प्रकार बदलाव लाना चाहिए?
कोई भी शिशु जब पैदा होता है तो उसे मालिश की और उबटन की अधिकाधिक जरूरत होती है। उबटन और मालिश किसी भी बच्चे के लिए अति आवश्यक होता है। अवश्यक इसलिए होता है क्योंकि इससे उसे शारीरिक और मानसिक विकास में मदद मिलती है और ऐसा न करने पर मानसिक और शारीरिक रूप से जीवन भर अस्वस्थ रहता है उसका शारीरिक विकास नहीं हो पाता हड्डियां कमजोर रहती है, त्वचा संक्रमण तो हो जाते हैं और न जाने कौन-कौन सी बीमारियां शिशु को घेरे रहती हैं।
प्राचीन काल में शिशु को मालिश करने के लिए बहुत ही लाभदायक जड़ी बूटी को सरसों के तेल में पकाकर कुछ देर से शिशु की मालिश की जाती थी और सरसों के दाने को पीसकर उसका उबटन बनाया जाता था फिर उस ऊबटन से मालिश किया जाता था।
परन्तु समय के साथ-साथ इन सभी चीजों में परिवर्तन होता चला आया है अब किसी भी नवजात शिशु के लिए कई तरह के तेल, क्रीम और पाउडर उपलब्ध होते हैं। जो शिशु के शरीर एक और मानसिक विकास में मदद करते हैं। उनकी त्वचा की सुरक्षा और उनको शारीरिक रूप से मजबूत बनाते हैं।
हालांकि समय के साथ-साथ सब कुछ बदल चुका है परंतु कुछ लोग आज भी पुराने ख्यालात की होती है वह अपने बच्चे को लेकर कोई भी लापरवाही नहीं बरतना चाहते हैं। इसीलिए मार्केट के रेडीमेड तेल और उबटन को अनदेखा करके घर पर अपने हाथों से उबटन बनाते हैं फिर से बच्चे की मालिश करते हैं।
बच्चे की मालिश जन्म से ही शुरू हो जाती है। उबटन से मालिश करना कुछ महीने बाद शुरू किया जाता है। सरसों में सबसे सबसे ज्यादा सरसों के तेल का उपयोग किया जाता है सरसों का तेल सरसों के दानों से निकाला जाता है और उन दानों में हल्दी, सरसों का तेल व दूध मिलाकर उबटन तैयार किया जाता है। यह उबटन हर तरह से बच्चे के लिए फायदेमंद साबित होता है। क्या आप जानते हैं इसके कितने फायदे होते है? तथा बदलते मौसम के साथ बच्चे को कैसे और कौन से उबटन लगाएं?
सरसों के दानों से बने उबटन निम्न प्रकार से लाभदायक है
- सरसों के तेल और सरसों के दानों से बने उबटन में ऐसे गुण शामिल होते हैं। जो बच्चे के विकास की गति को बढ़ा देते हैं।
- मालिश से शारीरिक रूप से स्वस्थ रहता है उसकी हड्डियां मजबूत होती हैं।
- मानसिक रूप से स्वस्थ रहता है उसकी कोशिकाओं में अनेक तरह के तनाव पैदा नहीं होते हैं।
- शरीर के अनचाहे बाल साफ हो जाते हैं और त्वचा चिकनी और मुलायम हो जाती है।
- अगर बच्चे का रंग गहरा हो तो धीरे-धीरे रंग साफ हो जाता है और चेहरे पर निखार आ जाते हैं।
- शरीर में होने वाली विभिन्न तरह की बीमारियों को दूर करता है और बीमारियों से से बचाए रखता है।
- यह उबटन रूखी त्वचा को नमी प्रदान करता है।
- शरीर के विभिन्न अंगों को विकसित करने तथा उन्हें मजबूत बनाने में मदद करता है।
- उबटन लगाने से त्वचा की चमक बढ़ जाती है। तथा उन्हें तरो-ताजगी बनी रहती है।
- शरीर के तमाम अंगों में आने वाली परेशानियां और रोग आने से पहले ही दूर हो जाती है।
- उबटन लगाने से बच्चे को किसी भी तरह का संक्रमण रोग नहीं होता।
- उबटन से मालिश करने से शारीरिक और मानसिक थकावट दूर हो जाती है।
बदलते मौसम में ऐसे लाए बदलाव
- नीम की पत्ती ठंडक प्रदान करती है। अधिक अधिक गर्मी में नीम की पत्तियों को पीसकर उबटन में मिलाकर लगाने से शरीर को शीतल प्रदान करने का कार्य करती है।
- गर्मी के मौसम में अनेक बीमारियों से त्वचा को बचाने के लिए उबटन में चुटकी भर अजवाइन मिलाकर उस पर लेप का उपयोग करना चाहिए
- इसमें चंदन का पाउडर मिलाकर लगाने से शीतलता प्रदान होती है।
- बादाम और चिरौंजी ऐसी चीज है जिस में तेल की मात्रा ज्यादा होती है ज्यादा सर्दी में ज्यादा ठंड पड़ने पर इन दोनों को पीसकर उसमें चने का बेसन और दूध अथवा मलाई मिलाकर पेस्ट बना लें। फिर उसे उपयोग में लाएं।
- सर्दी के मौसम में नमी और सुंदरता बरकरार रखने के लिए चने के बेसन, दूध, बादाम और चिरौंजी को पीसकर संतरे के छिलके का पाउडर मिलाकर उबटन तैयार कर ले।यह उबटन बहुत फायदेमंद होता है।(अगर संतरे का पाउडर कहीं ना मिले तो संतरे के छिलके को धूप में सुखाकर पीसकर पाउडर बना लें।)
- सर्दी के मौसम में उबटन बनाने के बाद और बच्चे को लगाने से पहले उस उबटन को हल्का गर्म कर ले ताकि बच्चे को लगाने के बाद उसे नुकसान ना करें।
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