'फैशन मैनेजमेंट का मास्टर' क्या होता है? विषय, संस्था और भविष्य के लाभ की पूरी जानकारी

 'मास्टर ऑफ फैशन मैनेजमेंट' की डिग्री फैशन प्रबंधन से जुड़े विभिन्न व्यवसाय में उन्नति करने के लिए अति आवश्यक है। वर्तमान समय में फैशन से जुड़े हुए हैं में सबसे दिलचस्प और प्रचलित व्यवसाय में से एक है। फैशन सेे जुड़े हर चीज की मांग दिन प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। इसीलिए आज के समय में फैशन प्रबंधन के व्यवसाय अति आवश्यक और जरूरी हो चुके हैं। फैशन मैनेजमेंट का प्रमुख कार्य होता है कि मीडिया और विज्ञापन द्वारा अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाए और उसके प्रति लोगोंं को जागरूक करें और बाजार में उत्पादन केेेेे विपणन की मांग को बढ़ाएं।

' फैशन मैनेजमेंट का मास्टर' किसे कहते हैं?

  •  फैशन प्रबंधन के अंतर्गत ऐसी जानकारी दी जाती है जिसमें प्रबंधकीय गुणवत्ता का प्रत्येक कार्यक्रम को बताया जाता है जो प्रबंधन अपेक्षाओं को पूरा करता है।
  • फैशन प्रबंधन में मार्केटिंग और बिक्री तथा फैशन व्यवसाय से जुड़ी छोटी-बड़ी चीजों के बारे में ज्ञात  कराया जाता है जो कलात्मक व रचनात्मक तरीके से वह छात्र मार्केटिंग को नया रूप देने और नए-नए आविष्कार करने में सक्षम हो सके।
  •  फैशन उद्योग के 2 साल के पाठ्यक्रम में ऐसी गंभीर शिक्षा दी जाती है जिसमें फुटकर बिक्री, मार्केटिंग, वस्त्र के बिक्री तथा अन्य बिक्री के क्षेत्र में अति आवश्यक जानकारियां फैशन प्रबंधन के मास्टर को प्रदान करता है।
  • फैशन उद्योग में फैशन प्रबंधन के मास्टर का कार्यक्रम केवल 2 साल का होता है जिसमें शुरू से आखिर तक यह बताया जाता है कि कोई भी उद्योग का कैसे विकास हुआ, कैसे वह विकसित हो रहा है और किस प्रकार और ज्यादा उसका विकास हो सकता है। 
  • फैशन प्रबंधन के मास्टर के डिग्री में रिसर्च मैनेजमेंट, सलाह परियोजना, अनुसंधान परियोजना अथवा व्यवसायिक परियोजना को आधार मानकर पूरे 2 वर्ष का कार्यक्रम समाप्त हो जाता है।
  • फैशन प्रबंधन का मास्टर, यह ऐसी कार्यप्रणाली है जिसकी अवधि 2 वर्ष की होती है। इस कार्यप्रणाली में प्रवेश करने के बाद छात्र को फुटकर बिक्री, मार्केटिंग, कपड़ों के बिक्री, खरीदने और बेचने की कला से नवाजा जाता है। ताकि फैशन उद्योग में प्रवेश करने के बाद उनका विकास पूर्ण रूप से हो सके।
  • फैशन मैनेजमेंट उन सभी कार्यक्रम के लिए आपको तैयार करता है ताकि आप प्रबंधकीय अपेक्षाएं को ध्यान में रखते हुए प्रबंधकीय संपत्ति जो होती है उनको समझ सके। परंतु इसके लिए गहन परिश्रम करना पड़ता है।

 इस पाठ्यक्रम के निम्न विषय होते हैं

फैशन प्रबंधन के मास्टर द्वारा इन विषयों का अध्ययन करके फैशन उद्योग के कई क्षेत्र जैसे निधि संगठन, सरकारी व्यापारिक सलाहकार अथवा क्लस्टर के साथ काम करके  अपना खुद का व्यापार शुरू कर सकते हैं या फिर किसी भी क्षेत्र में आसानी से प्रबंधन अथवा व्यापार की नौकरी पा सकते हैं।  फैशन प्रबंधन के मास्टर के द्वारा इस पाठ्यक्रम में प्रमुख 2 विषय होते हैं जो इस प्रकार है।
1. फैशन रिटेलिंग - इसमें फुटकर बिक्री, उपभोक्ता, उद्यमशीलता और मार्केटिंग के प्रत्येक चरणों की छोटी बड़ी प्रत्येक जानकारी बताई जाती है।
फैशन रिटेलिंग में सक्षम होने के बाद छात्र अपना खुद का व्यवसाय शुरू कर सकते हैं जिसमें अपना खुद‌ का खुदरा ब्रांड, बुटीक आदि व्यवसाय शामिल है अथवा मार्केटिंग के क्षेत्र में जाकर कोई भी नौकरी प्राप्त कर सकते हैं। जिसमें अपनी इच्छानुसार खरीद, बिक्री, अनुसंधानकर्ता‌ तथा खुदरा उद्यम भी बन सकते हैं।
 2.उद्यमिता अथवा उद्यमव्रृत्ति - इसमें छात्रों को पढ़ाई के साथ-साथ यह बताया जाता है कि वह नौकरी कि सिर्फ तलाश ही ना करें बल्कि खुद अपना किस प्रकार व्यवसाय शुरू करें। उसे बुलंदी पर लेकर जाए इस रचनात्मक कला को क्रियात्मक अभ्यास में परिवर्तित कराया जाता है। इससे लाभ यह होता है कि कोर्स पूरा होने के बाद किसी भी क्षेत्र मेंं आसानी से नौकरी मिल जााती है या फिर अपना खुद का नया व्यापार शुरूू किया जा सकता है। इस पाठ्यक्रम में 3 चरण होतेे हैं।1. उद्यमिता केेे बारे में जागरूकता, 2. उधमिता कौशल का विकास, 3. व्यवहार मेें सिद्धांत।

फैशन मैनेजमेंट के उद्देश्य

कोई भी काम व्यवसाय व्यापार अथवा प्रबंधन सभी को करने का एक उद्देश्य होता है। फैशन प्रबंधन का एकमात्र उद्देश्य है कि फैशन मैनेजमेंट में प्रवेश करने वाले छात्र को पूर्ण रूप से सर्वोत्तम बनाना जिससे वे उम्मीदवार के उम्मीदों और सपना को साकार कर सके तथा उनके भविष्य को एक दिशा अथवा आकृति प्रदान करे।
 फैशन मैनेजमेंट में प्राप्त ज्ञान का उद्देश्य यह भी होता है कि छात्र की बुद्धि इतनी तीव्र हो ताकि नई कल्पना को खोज सकें अथवा उनका निर्माण कर सके।

फैशन मैनेजमेंट के व्यवसाय के अवसर

'फैशन मैनेजमेंट के मास्टर' इस कोर्स को करने के बाद छात्र को व्यवसाय के बहुत सारेेे अवसर अथवा विकल्प मिल जााती हैंजिनके माध्यम से वह अपने भविष्य को बुलंदी पर ले जा सकते हैं ऐसेेे कुछ अवसर निम्न है जिनके माध्यम से वे अपना खुद का व्यापार शुरू कर सकते हैं।
1. खुद का बुटीक खोलना
ब्यूटी क्या होता है? यह शायद कुछ ही लोगों को पता होता है मैं तो आज आपको बता रहे हैं की हम जो फैशनेबल और ट्रेंडिंग कपड़े पहनते हैं वह कपड़े टेलर सिलता है परंतु उसकी विभिन्न तरह की डिजाइन बुटीक में तैयार की जाती है। बुटीक में लागत देकर अधिक मुनाफा कामाया जा सकता है। फैशन मैनेजमेंट ऑफ मास्टर का कोर्स करने के बाद आप अपना खुद का बुटीक घर अथवा बाजार में खोल सकते हैं। अमेजॉन और फ्लिपकार्ट के द्वारा ऑनलाइन में अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाा सकते हैं।
2. परिधान शाखा के माध्यम से अपना भविष्य बनाना
फैशन मैनेजमेंट का कोर्स करने के बाद पर व्यवसाय करने का परिधान ब्रांड एक ऐसा विकल्प है जिसे अपने भविष्य को निकाल जा सकता है। इसमें कम लागत में कपड़े खरीद कर उसमें अपने एक्सपेरिमेंट करके नए-नए डिजाइन तैयार करके उन्हें भेज सकते हैं या फिर खुद का ब्रांड खोल सकते हैं यहां तक कि टीवी स्टार और फिल्म स्टार के कपड़े में डिजाइन कर सकते हैं।
 3. फैशन मार्केटिंग का मैनेजर बनना
फैशन मार्केटिंग मैनेजर का काम फैशन उत्पाद से जुड़े मार्केटिंग को चलाना और उसे अधिक से अधिक आगे बढ़ाना होता है। परंतु यह सब उसकी योग्यता पर निर्भर होता है कि वह किस प्रकार फैशन से जुड़े दुकान व्यवसाय अथवा फैशन शाखाओं का विज्ञापन तैयार करें जिससे अधिक से अधिक लोग पसंद आकर्षित हो और फैशन मार्केटिंग को ऊंचाई पर ले जाए। इसके लिए तीव्र बुद्धि धैर्य और कड़ी परिश्रम की अत्यधिक जरूरत पड़ती है।
4. खुदरा श्रृंखला का बाजार 
कपड़ा अथवा कोई भी चीज खरीदार दुकान, कोई शाखा अथवा बुटीक से अधिक मात्रा में निर्माता व बेचने वाले से थोक का कमाल खरीद कर उसे फुटकर बिक्री करता है। यह बिक्री दुकान, शाखा अथवा ऑनलाइन भी की जा सकती है।
5. किसी संस्था मेंं शिक्षा देना
यह कोर्स करने के बाद छात्र किसी भी संस्था में जाकर फैशन प्रबंधन का अध्ययन अन्य विद्यार्थियों को करा सकते हैं। या फिर खुद की एक संस्था खोल कर उसे ऊंचाई पर ले जा सकते हैं।

फैशन प्रबंधन के मास्टर शिक्षा प्रदान करने वाले प्रमुख संस्था
  1. जेवियर लेबर रिलेशंस इंस्टीट्यूट (जमशेदपुर)
  2. एसपी जैन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट ऑफ रिसर्च (मुंबई)
  3. इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट (कोझीकोड)
  4. सिडेनहैम इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज रिसर्च एंड एंटरप्रेन्योरशिप एजुकेशन (मुंबई)
  5. भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (चेन्नई)
  6. इंडियन स्कूल ऑफ डिजाइन एंड एनोवेशन (मुम्बई)
  7. एमआईटी इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (पुणे)
  8. वोग फैशन इंस्टीट्यूट (नई दिल्ली)
  9. डिजाइन की एआरसीएस अकैडमी (जयपुर)
  10. एफडीडीआई नोएडा (नोएडा मुख्यालय)
  11. एफडीडीआई मुंबई (मुंबई)
  12. एफडीडीआई चेन्नई (चेन्नई)
  13. एफडीडीआई कोलकाता (कोलकाता)
  14. परिधान प्रबंधन संस्थान (गुड़गांव)
  15. सत्यम फैशन इंस्टीट्यूट (नोएडा)
  16. एच डी पी एस महिला कॉलेज (इंदौर)
आशा करती हूं कि आपको मेरा आर्टिकल पसंद आया होगा मेरा आर्टिकल हिंदी में पढ़ने के लिए प्लीज सब्सक्राइब कर दीजिए अगर मेरा आर्टिकल पसंद आया हो तो लाइक और शेयर जरूर कीजिएगा।

Comments

Popular posts from this blog

कपड़े की डिजाइन में रंगों का क्या महत्व है?

क्यों जरूरी होता है त्वचा के रंग के अनुसार ही कपड़ों के रंग का चयन करना?

वर्तमान समय मे मानव जीवन पर फैशन का दुष्प्रभाव