भारतीय साड़ी का महत्व और विभिन्न देशों में साड़ी का फैशन 2020

किसी भी व्यक्ति के पहनावे या वेशभूषा से उस व्यक्ति के देश, उसकी संस्कृति और सभ्यता की पहचान होती है।

भारतीय साड़ी का महत्व

 भारतीय उद्योग में कई प्रधानों ने जन्म लिया। जिसमें से किसी परिधान का अस्तित्व धीरे धीरे धीरे बदल गया, किसी परिधान ने नया रूप ले लिया तो कोई परिधान अपनी जगह सीमित है। ये  से जिसका स्वरूप अभी तक नहीं बदला है वह साड़ी है।भारतीय साड़ी भारत के अलावा अन्य देशों के लोग भी काफी पसंद किए जाते हैं। साड़ी भारत देश के अलावा पाकिस्तान बांग्लादेश अमेरिका जैसे और भी देशों में भी बहुत प्रसिद्ध है।

साड़ी का जन्म और चलन भारत देश से शुरू हुआ। यह एक ऐसा परिधान है जिसका प्रशन सदियों से चला आ रहा है यह भारत का सबसे पुराना और प्रसिद्ध परिधान है इसका चलन ना कभी खत्म हुआ है बल्कि धीरे-धीरे इसकी प्रशंसा और प्रशंसा पूरी दुनिया में फैलता हुआ नजर आ रहा है। इसे भारतीय महिलाओं ने बहुत शौक से पहनती है।

आधुनिक समय में साड़ी हथकरघा और पावर लूम से बनाई जाती है लेकिन पुराने समय में इसके हाथों से की जाती थी कोई मशीन नहीं थी। राजा महाराजाओं के समय में इस साड़ी पर सोने व चांदी के तारों से बेहतरीन डिजाइन और काम किए जाते हुए देखने में बहुत ही खूबसूरत लग जाते हैं। हालाँकि आज के समय में भी साड़ी का उतना ही महत्त्व है जैसा कि पहले था। कोई भी विशेष अवसर हो हर महिलाएं भारतीय साड़ी को ही अपना प्रमुख वस्त्र समझती है और पहनती है।

भारत में जितने प्रकार के देश है उतने प्रकार की साड़ी पहनने के तरीके यह फिर यूं कहें है कि भारत के अलग-अलग देशों में अलग अलग तरीके से साड़ी पहनी जाती है वैसे साड़ी की लंबाई केवल 5 ही होती है फिर भी लोग उसे अतरंगी तरीकों से बनाकर पहनते हैं जिससे उनकी शोभा में चार चांद लग जाता है। कुछ ऐसे ही देश व शहर है जो साड़ी के मामले में प्रसिद्ध है उनके बारे में निम्न जानकारी दी गई है।

भारतीय साड़ी का फैशन

1 उत्तर प्रदेश

उत्तर प्रदेश का प्रमुख शहर बनारस जो बनारसी साड़ी के लिए देशभर में बहुत प्रसिद्ध है। बनारसी साड़ी हथकरघा और पावर लूम से निर्मित किया जाता है। यह साड़ी रेशम, जरी व असली तार से फूल पत्तों के जंगलादार डिजाइन बने होते हैं। साड़ी पर महीन अथवा घने आंचल व बॉर्डर होता है और पूरे साड़ी पर रेशम, मोती व टोन से काम बना होता है जिससे साड़ी और भी ज्यादा भारी और खूबसूरत दिखने लगती है। बनारसी साड़ी उत्तर प्रदेश के अलावा कई अन्य शहरों में भी बहुत प्रसिद्ध है। 

ज्यादातर शादी में दुल्हन को इससे तैयार किया जाता है। लाल बनारसी साड़ी में दुल्हन की खूबसूरती और बढ़ जाती है। साड़ी के अलावा बनारस में पावर लूम द्वारा लहंगे भी तैयार किए जाते हैं शादी में साड़ी के अलावा लहंगो भी बहुत महत्व है।


2. तमिलनाडु की साड़ी

तमिलनाडु में स्थित कांचीपुरम नामक स्थान पर साड़ी के बारे में जाता है इसीलिए इसका नाम भी कांचीपुरम पड़ गया। साड़ी को असली रेशम और जरी के धागों से बनाया जाता है। साड़ी में आंचल और बॉर्डर बहुत चौड़े और महीन डिजाइन वाले होते है।इस साड़ी में साड़ी में फूल पत्ती,पशु पक्षी, मंदिर व घंटियों की डिजाइन बनी होती है जिनपर बेहतरीन काम बना होता है।


3. पश्चिम बंगाल की साड़ी

पश्चिम बंगाल की प्रसिद्ध साड़ी बालुचरी है। यह पश्चिम बंगाल के ही शहर में बनती है जो विष्णुपुर और मुर्शिदाबाद नाम से प्रसिद्ध है। यह ऐसी साड़ी है जिसे बनाने में 2 हफ्ते का समय में जाता है इस साड़ी पर अनेक धार्मिक दृश्य, पशु पक्षी के दृश्य, मंदिर अथवा लोगों के दृश्य आदि कढ़ाई के जरिए साड़ी के आंचल में पला पर बनाए जाते हैं। पश्चिम बंगाल के राज्यों के नाम है जहां साड़ी बनारस में भी बनाई जाती है और बालुचरी साड़ी पूरे विश्व में प्रसिद्ध है। प्राचीन काल में रानी और महारानी के लिए इस साड़ी पर शुद्ध सोने की तार से विभिन्न आकृतियों को उकेरा जाता था। खूबसूरती आज भी कम नहीं हुई या फैशन के जरिए सभी महिलाओं की जीवन से जुड़ा हुआ है।


4. सूरत की साड़ी

सूरत में कलमकारी नाम की साड़ी सर्व प्रसिद्ध है। सूरत के अलावा यह साड़ी बनारस, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश में भी बनाई जाती है। कलमकारी नाम सुनते ही इसका मतलब समझ में आ जाता है कलम का अर्थ तो सभी जानते हैं और कारी का अर्थ होता है कारीगरी। अर्थात साड़ी पर कलम से सुंदर रंगो द्वारा कारीगरी अथवा मुद्राए बनाई जाती हैं। टीवी की मशहूर हस्तियां बनारसी साड़ी के अलावा इस कमल कारी साड़ी को बहुत ही चाव से अपने खास अवसरों पर पहनती हैं।

5. उड़ीसा की साड़ी

उड़ीसा पाटचित्रा नाम की साड़ी के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। पाट का मतलब होता है कपड़ा या पट्टा और चित्रा का मतलब होता है चित्र अर्थात साड़ी के कपड़े पर चित्र बनाना।

पाटचित्रा साड़ी पर धार्मिक स्थान,स्थल व लोगों के दृश्य को हाथों के माध्यम से चित्रित किया है। इसमें उपस्थित अतरंगी रंग किसी का भी मन मोह लेते हैं। इस साड़ी को बनाने में महीनों गुजर जाते है। पर इसे पसंद करने वाले लोगों की संख्या की कोई कमी नहीं।

6.बंगाल की साड़ी
जामदानी नामक साड़ी के लिए बंगाल हर जगह प्रसिद्ध है। बंगाल के अलावा ढाका में बनाया जाता है। जाम का अर्थ 'फूल' होता है। जामदानी साड़ी बहुत ही प्राचीन है और प्रसिद्ध भी इतनी प्राचीन होने के बाद भी यह बिल्कुल भी नहीं बदली बल्कि वैसी ही है जैसे पहले थी। यह साड़ी इतनी प्रसिद्ध है कि उच्च वर्ग की महिलाएं इसे बहुत ही महत्व देती हैं। यह बहुत परंपरागत और खूबसूरत साड़ी होती है। इसीलिए विशेष अवसरों पर से पहना जाता है।

आजकल की टीवी स्टार परंपरागत साड़ियों को पहनकर पूरे विश्व में अपनी संस्कृति और सभ्यता को प्रभावित कर रहे हैं। साड़ी कभी फैशन के बाहर नहीं होता है यह तो सभी जानते हैं इसीलिए साड़ी पहनते वक्त कोई भी फैशन के ट्रेंड पर ध्यान नहींं देता। उपरोक्त बधाा गई साड़ी का महत्व प्राचीन काल से अभी तक बरकरार है।

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