उबटन,शाही उबटन और आयुर्वेदिक उबटन में क्या फर्क है?
क्या आप जानते हैं उबटन क्या होता है? या
उबटन किसे कहते हैं?
उबटन किसे कहते हैं?
उबटन प्रमुख रूप से तीन प्रकार के होते हैं
सामान्य उबटन
वर्तमान समय में त्वचा को निखारने के लिए बहुत तरह की उत्पाद उपलब्ध है परंतु पुराने जमाने में ऐसा बिल्कुल नहीं था कोई क्रीम नहीं थी लोग क्रीम की जगह पर उबटन का उपयोग करते थे अपने रंग को साफ करने और त्वचा को निखारने के लिए उबटन बहुत लाभकारी होता था और आज भी है। उसके बारे में ज्यादातर लोगों को जानकारी ही नहीं है बहुत से लोग उसके नाम से ही अनजान है उधर का नाम सुनते ही शादी का ख्याल आ जाता है क्योंकि यह ज्यादातर शादी में दूल्हा दुल्हन को लगाते हुए देखा जाता है। उबटन को घर में तैयार किया जाता है फिर इसे चेहरे पर और विभिन्न अंगों पर लगाया जाता है।इसे बनाने की सामग्री और विधि इस प्रकार है-
बेसन-- दो चम्मच
हल्दी का पाउडर -- आधा चम्मच से कम
गुलाब जल-- कुछ बूंदे
नारियल का तेल -- एक चम्मच
दूध -- दो से तीन चम्मच
नींबू रस -- आधा चम्मच
लाल मसूर दाल के पाउडर -- एक चम्मच
बेसन --दो चम्मच
आटा -- एक चम्मच
शाही उबटन
सामान्य उपटन तो सामान्य लोगों के लिए होता है। पुराने समय में राजा महाराजा और राज दरबार में रहने वाले लोगों के लिए खासकर महिलाओं और बालिकाओं के लिए जो प्लान तैयार किया जाता था उसे शाही उबटन कहते हैं। उनको चाहे उतनी इसलिए कहा जाता था क्योंकि जब उस उबटन को बनाया जाता था तो उसमें सामान्य उबटन में मिली सामग्रियो के साथ कीमती और महंगी जड़ी बूटी, खुशबूदार तेल का उपयोग करके उनका पेस्ट बनाकर तैयार कर लिया जाता था फिर उस पेस्ट का उपयोग किया जाता था। शाही उबटन, साधारण उबटन से ज्यादा गुणकारी, लाभकारी और असरदार होता है।
अखरोट का पाउडर -- एक चम्मच
बादाम पाउडर -- दो चम्मच
मसूर दाल पाउडर -- एक चम्मच
गुलाब की पंखुड़ियों का पाउडर -- एक चम्मच
बेसन -- दो चम्मच
हल्दी पाउडर -- आधा चम्मच
बादाम का तेल -- एक चम्मच
जैतून का तेल -- आधा चम्मच
गुलाब जल -- दो चम्मच
नींबू का रस -- 5 से 6 बूंद
दूध -- आवश्यकता अनुसार
आयुर्वेदिक उबटन
आयुर्वेद का नाम सुनते ही दिमाग में विभिन्न तरह की जड़ी बूटी का ख्याल आ जाता है। जी हां, आयुर्वेदिक उबटन भी जड़ी बूटियों से मिलकर बना होता है जिसमें चंदन, नीम की पत्ती, सौंफ, बादाम, बेसन आदि को बारीकी से पीसकर पेस्ट को तैयार किया जाता है। इसकी भी बहुत सारे गुण और फायदे हैं जो नुकसान देह नहीं होते। शरीर के त्वचा में जब समस्याओं का आगमन हो जाता है।तो उनके दोषों के अनुसार आयुर्वेदिक उबटन को तीन भागों में विभाजित किया गया है। वाक,पित्त और कफ।मनुष्य के शरीर में जब इन तीनों दोषों का संतुलन बना रहता है तो उनका शरीर स्वस्थ रहता है किसी एक की भी कमी होने से शरीर में बीमारी पैदा हो जाती है।आयुर्वेदिक उबटन को इस तरीके से बनाया जाता है-
8-9बादाम को रात भर भिगोकर रख दे
तुलसी और बेसन का पाउडर ले
नीम के पत्तों को जरूरत अनुसार ले
शीशम का तेल
सौंफ का पाउडर बना लें
चंदन और हल्दी का पाउडर ले
इन सभी चीजों का मिक्सर बनाकर पेस्ट तैयार कर लें
इन सभी उबटन को अपनी अपनी विधियों के अनुसार हफ्ते में दो से तीन बार उपयोग कर सकते हैं। उबटन के हल की मोटी परत चेहरे पर लगाएं। 10 से 15 मिनट तक उसे सूखने दें। सूखने के बाद हाथों को पानी से गिला करके फेस पर हल्के हाथ से रगड़े और छुड़ा ले उसके बाद शादी पानी से इसको धूल है कोई साबुन या फेसवास का इस्तेमाल ना करें।उबटन को रात में सोने से पहले लगाने से ज्यादा असरदार होता है क्योंकि रात में सूरज की किरणों का असर चेहरे पर नहीं पड़ती और सुबह उठ कर अपने चेहरे पर उसका निखार साफ देख सकते हैं।
उबटन सदियों पुरानी लेप है। जिसका उपयोग आज के जमाने के लोग भी करते हैं परंतु वर्तमान समय में मार्केट में उबटन का पैक दो तरह का आता है। पाउडर फेस पैक और ट्यूब में पेस्ट फेस पैक।
पाउडर फेस पैक को बाउल में निकाल कर गुलाब जल मिलाकर उसका पेस्ट बनाया जाता है और चेहरे पर लगाया जाता है परंतु ट्यूब वाले फेस पैक को ओपन करके डायरेक्ट फेस पर लगाया जाता है।
सामान्य उबटन, शाही उबटन और आयुर्वेदिक उबटन के फायदे जानने के लिए मेरा अगला आर्टिकल जरूर पढ़ें।मेरी आईडी कल आपको कैसा लगा कमेंट करके जरूर बताइएगा अगर आपको मेरा टिकट पसंद आया हो तो लाइक, शेयर और सब्सक्राइब जरूर कर दीजिए।



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