फैशन डिजाइन के 5 प्रमुख सिद्धांतों का वर्णन कीजिए
फैशन डिजाइनर एक अनोखी फैशन शैली को बनाने के लिए विभिन्न तत्वों और सिद्धांतों के आधार पर अपना कार्य करते हैं। उस फैशन को सुंदर और आकर्षक बनाने के लिए अनेक कलात्मक तरीके से विभिन्न प्रकार के तत्वों को शामिल करके एक नई शैली तैयार करते हैं।जो सभी को आकर्षित करने योग्य होता है।
एक फैशन क्षेत्र के कुछ माहिर डिजाइनर किसी भी फैशन शैली की रचना में उपस्थित घटक को सुन्दरतापूर्वक रूप से फैशन के क्षेत्र में प्रसिद्ध और प्रचलित बनाने के लिए उसे फैशन के सिद्धांतों को अनुसरण करते है। ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग उसे पसंद करें।
फैशन समय, स्थिति, आकार, आवश्यकता और लोगों की जरूरत के अनुसार समय-समय पर बदलती रहती है।यह फैशन कुछ प्रमुख सिद्धांतों पर आधारित है। जो इस प्रकार हैं_
फैशन डिजाइन के 5 प्रमुख सिद्धांत
1.एकता
एकता का अर्थ होता है समानता तथा एकत्रित होना। यह ऐसा सिद्धांत है जो किसी भी फैशन शैली के घटक को संगठित करता है अथवा एकत्रित करता है। यह सिद्धांत फैशन शैली के सभी तत्वों को एक ताल में समानता के साथ बने रहने के लिए बढ़ावा देता है।यह एकता 4 सिद्धांत पर कार्य करती है-
- रेखा की अनुरूपता-कोई भी ड्रेस बनाते समय उसने उपस्थित रेखा को एक समान रखना चाहिए। कपड़े में उपस्थित सभी रेखाओं की अनुरूपता हर तरफ से देखने में एक समान होनी चाहिए। फिर चाहे वो रेखा सीधी हो, तिरछी हो या फिर किसी भी तरह से गई हो। अगर रेखा सीधी गई है तो उसके बाद वाली सभी रेखाएं उसी तरह सीधी होनी चाहिए अगर रेखा खींची गई है तो उसके बाद वाली सभी रेखाएं देसी होनी चाहिए और उन रेखाओं के बीच सामान स्थान होना चाहिए।
- आकार की अनुरूपता-कोई भी ड्रेस बनाते समय उसके आकार की अनुरूपता का ध्यान रखना आवश्यक है। कहने का तात्पर्य है कि हर व्यक्ति एक जैसा नहीं होता सबके शरीर अंगों की बनावट अलग-अलग प्रकार की होती है। उसी बनावट के आधार पर कपड़ों के आकार में अनुरूपता आने ही चाहिए।
- बनावट की अनुरूपता-कोई भी ड्रेस बनाते समय सर्वप्रथम इस बात का ज्ञान होना चाहिए कि वह ड्रेस किस तरह के कपड़े व मटेरियल से बनी है ताकि उस में दूसरा कोई अन्य सामान अथवा कपड़ा लगाते समय उसकी बनावट की अनुरूपता में कोई परेशानी ना हो। जैसे कि कोई नेट का गाउन बनाते समय जरूर पड़ने पर उसमें डेनिम का कपड़ा नहीं लगा सकते। बल्कि नेट से ही मिलता जुलता कपड़ा लगाने से ही उसकी बनावट में अनुरूपता आएगी।
- रंग की अनुरूपता-कोई भी ड्रेस बनाते समय सबसे पहले उचित रंगों का चयन करना आवश्यक है। अगर एक ड्रेस दो या तीन रंगों से मिलकर बनी है तो ऐसे रंगों को शामिल करना चाहिए जो एक दूसरे से मिलने पर खूबसूरत तथा स्टाइलिश दिखाई दे और आकर्षित लगे।
- औपचारिक संतुलन-वस्त्र पर बनाए गए कोई ऐसा डिजाइन जो एक समानांतर की दूरी पर अथवा सीधी लाइन में बनाया गया हो और देखने में संतुलित लगे वह औपचारिक संतुलन कहलाता है।
- अनौपचारिक संतुलन-किस सिद्धांत में कोई भी वस्तु पर किसी भी तरह का डिजाइन एक साइड में अथवा एक तरफा बना होता है जो एक अलग लुक देता है जो देखने में स्टाइलिश और फैशनेबल लगता है वह अनौपचारिक संतुलन के अंतर्गत आता है।
- लय का दोहराना-यह ऐसा सिद्धांत होता है जिस में लय को दोहराया जाता है जैसे कि किसी भी कपड़े में कोई भी छोटे-छोटे डिजाइन या बड़े आकार के प्रिंट एक से अधिक मात्रा में समानांतर पर होते हैं,लय का दोहराना उसे ही कहते हैं।
- क्रमबद्ध लय-इस सिद्धांत में कोई भी लय पूरी कपड़े में एक क्रम से एक समान दूरी पर होती है इसे क्रमबद्ध लय कहते हैं।
- विवरण लय-इस सिद्धांत में होता यह है कि किसी भी ड्रेस पर कोई एक छोटी या बड़ी सी फूल या किसी अन्य चीज़ों की डिजाइन कहीं पर बनी होती है।जो ड्रेस के बीच में या कोने में हो और उससे जुड़ती हुई अनेक लय ड्रेस का अधिकांश हिस्सा कवर करती है। इस प्रकार की लय को विवरण लय कहते हैं।
Comments