फैशन का इतिहास कैसा था?

 फैशन का इतिहास यह नाम सुनते ही लोगों के मन में बहुत सारे सवाल आ जाते हैं कि इतिहास में कैसे कपड़े पहने जाते थे, कैसे उन्हें डिजाइन किया जाता था, कौन बनाता था, किस तरह से उन्हें सिला जाता था और वे कपड़े किस चीज के लिए पहनते थे। पहनने वाले थे। पहनने वाले थे। बने होते थे। यह सब जानकारी के लिए लोग सोचते हैं कि यह जाने के लिए कौन हमें बताएगा, कहां से, किससे पूछें और कैसे चलें। क्या हाल देश व शहर में अलग-अलग तरह के कपड़े पहने जाते थे, बच्चे कैसे कपड़े पहनते थे, क्या औरतें सिर्फ साड़ी पहनती थीं, आदमी का ड्रेस कैसा था। क्या वो लोग सिर्फ शरीर को ढकने के लिए कुछ भी, किसी भी तरह के कपड़े पहन लते थे या उनमें भी फैशन सेंस होता था आइए इस बारे में जानते हैं।

फैशन का इतिहास

विश्व का निर्माण होने के बाद सबसे पहले आदिमानव दुनिया में आया और वह अपने शरीर को ढकने के लिए घास, जानवरों के कपड़े, पेड़ के पत्ते और छालों का प्रयोग करते थे और फिर जैसे-जैसे आबादी बढ़ती गई वैसे ही पेड़ के पत्ते और छालें की जगह कपड़ों का उपयोग होने लगा। उन कपड़ों को सुंदरता नामक शब्द से जोड़ दिया गया फैशन का आगमन धीरे-धीरे होने लगा और हर वस्त्र में लोग सुंदरता को ढूंढने लगे।
लोगों ने उन पर तरह-तरह के अविष्कार करके नए नए कपड़े तैयार किए जो लोगों के काम में आने लगे। उन कपड़ों को सूची और कागजों से सिला जाने लगा। कुछ समय बाद फिर सिलाई मशीन का सूचक हुआ जो सबसे पहले रूस की एक गुफा में हड्डियों के साथ पाया गया है। लोगों ने अपने कपड़े सिलना शुरू कर दिए और उसके विपरीत व आकार के कपड़े सिलने में उन्हें सहायता मिली।
जैसे-जैसे समय बीतता गया लोग अपने धर्म और जाति के हिसाब से कपड़े पहनने लगे हिंदू औरतें साड़ी व ब्लाउज पहने हुए और पुरुष धोती व कुर्ता पहनने लगे और मुस्लिम औरतें सलवार, समीज, दुपट्टा और पुरुष कुता, पजामा, टोपी, लूगी वगरह पहनने लगे। इसी प्रकार हर धर्म में अलग-अलग तरह के कपड़े और वेशभूषा पाए जाते हैं जिससे उसके धर्म को भिन्नाना हो सकता था। उस समय लोग ने देश की संस्कृति, सभ्यता और परंपरा का बहुत पालन करते थे और उसके अनुसार ही कपड़े वगैरा पहनते थे। परंतु इस समय लोग फैशन में धर्म जाति को नहीं देखते।
समय बीता गया और फिर कई राजा महाराजा ने अलग-अलग क्षेत्र पर राज्य करना शुरू कर दिया। उन क्षेत्रों पर राज करने वाले शासक राजा महाराजा के लिए अनोखे व आकर्षक वस्त्र तैयार होने लगे और प्रजा के लिए साधारण आभूषण बनते थे। वो अनोखे ड्रेस हथकरघा से बने बेहतरीन डिज़ाइन व आकार के होते थे। जो खूबसूरत रंगों के साथ अलग-अलग प्रकार के सिले होते थे और उन्हें सिलने वाला बहुत हुनर ​​रखता था उसके हाथ के बने कपड़े बेहद काबिल ए तारीफ होते थे। जिसका स्थान इस समय फैशन डिजाइनर ले चुके हैं।
उस समय कपड़े हाथों से बनाए जाते थे परंतु धीरे-धीरे जैसे-जैसे समय बीतता गया तरह-तरह के मशीन का आविष्कार हुआ। उन मशीनों को हाथ चलाकर कपड़े बुने जाते थे फिर जब बिजली का अविष्कार हुआ तो मशीनें हाथों की जगह बिजली से चलने लगी और तरह-तरह के कपड़े उससे ही बनने लगे वर्तमान समय में ज्यादा से ज्यादा कपड़े मशीनों द्वारा ही बनाए जाते हैं। फिर उन कपड़ों पर हाथों से हैंड वर्क करके उन्हें और खूबसूरत बनाया जाता है। भारतीय कपड़े हमेशा से देश भर में प्रसिद्ध थे और आज भी है।
कपड़ों के अलावा अपनी सुंदरता को बढ़ाने के लिए वे आभूषणों की जगह फूलों के मालाओं को बनाकर पहनने लगे बाद में सोने चांदी हीरे मोती और कई तरह के पत्थरों से जुड़े आभूषण तैयार होने लगे जिन्हें पुरुष व महिला दोनों पहनते थे। गहनों से सिर्फ मनुष्य ही नहीं बल्कि देवी देवताओं को भी सज्जित किया जाता था अनोखे तरह के नक्काशी दार आभूषण से सुशोभित किया जाता था। पहले के गहने अब के मुकाबले बहुत अलग होते थे। जिनको बनाना अब शायद किसी के बस की बात नहीं है।
घरों और महलों की सजावट के लिए सजावटी सामान विभिन्न तरह के चीजों के प्राप्तकर्ता से बनाए जाते थे। जिन्हें बनाने की विधि बेहद कलात्मक होती है। महलों की दीवारों और उन में सजाए जाने वाले सामानों पर जो नक्काशी बनी रहती थी। वह आज के समय में सबको हैरान कर देती है।
प्राचीन काल से नक्काशी के साथ-साथ चित्रकारी का भी बहुत लोग हुनर और शौक़ रखते थे। विभिन्न तरह के आकृति वाले चित्र मनुष्य वह पेड़ पौधों के चित्र बनाने में माहिर थे जो देखने में बिल्कुल प्राकृतिक लगते थे और इस कारण वे अपनी खास पहचान बनाने में सफल भी रहे। वर्तमान समय में इसकी जगह फोटोग्राफर ने ले ली है। इसे कैमरे का मोबाइल से खींचा जाता है और मशीनों द्वारा इसका प्रिंट आउट निकलता है।
फैशनेबल कपड़ों को ध्यान में रखते हुए उस समय सबसे पहले फ्रांस में पहली पत्रिका छपी और देश भर में उसकी चर्चा होने लगी धीरे-धीरे या प्रसिद्ध हो गया। उस पत्रिका में फैशन से जुड़े बहुत सारी चीजों का उल्लेख किया गया था और फिर धीरे-धीरे इसका चलन बढ़ता गया और आज भी मैगजीन तथा न्यूज़पेपर के रूप में हमें हर जगह आसानी से प्राप्त हो जाता है जिसमें फैशन की लेटेस्ट न्यूज़ और फैशन से जुड़े अपडेट्स मिलती रहती है।

आशा करती हूं आपको मेरा आर्टिकल अगर पसंद आया तो लाइक और शेयर कर कृपया। सब्सक्राइब करना प्लीज मत बोलिएगा।कमेंट द्वारा जरूर बताइए कि आपको मेरा आर्टिकल कैसा लगा।

Comments

Popular posts from this blog

कपड़े की डिजाइन में रंगों का क्या महत्व है?

क्यों जरूरी होता है त्वचा के रंग के अनुसार ही कपड़ों के रंग का चयन करना?

वर्तमान समय मे मानव जीवन पर फैशन का दुष्प्रभाव