आधुनिक समय में आधुनिकता का कारण फैशन है। फैशन के कारण है समाज के हर चीज और हर स्थिति में समय-समय पर परिवर्तन होते रहते हैं। फैशन के कारण होने वाले परिवर्तन को सिद्धांतों के रूप में दर्शाया जाता है अथवा सिद्धांतों के अनुरूप फैशन के विभिन्न चरणों को प्रतिबंधित किया जाता है।फैशन में परिवर्तन होना कोई नई बात नहीं है क्योंकि यह वर्षों से चल रहा है। जिसमें समय के साथ-साथ परिवर्तन होते रहते हैं। फैशन विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक स्तर पर लोगों को जोड़े रखता है। समाज में रहने वाले विभिन्न धार्मिक व्यक्ति फैशन को धर्म से ज्यादा महत्व देने लगे हैं और फैशन से जुड़े व्यापार करने लगे हैं।
हालांकि फैशन परिवर्तनशील है। फैशन द्वारा किसी भी क्षेत्र में परिवर्तन होना कोई बड़ी बात नहीं। कुछ चीज़ों में परिवर्तन होता है और वह चीज लंबे समय तक फैशन के प्रवृत्तियों में बना रहता है परंतु कुछ ऐसी चीजें होती है जो बहुत जल्द ही फैशन ट्रेंड से बाहर हो जाती हैं। और उन चीजों को आकार रूप आकृति प्रदान करने के लिए विभिन्न तत्व बनाने के लिए फैशन के सिद्धांत की आवश्यकता पड़ती है क्योंकि इन सिद्धांतों के आधार पर ही फैशन ड्रेस अथवा कोई भी चीज को सफल बनाया जा सकता है अथवा उनमें सफलता हासिल की जा सकती है। फैशन सिद्धांत किसी भी प्रकार की फैशन शैली की उत्पत्ति करता है।फैशन से जुड़ी कोई भी चीज को फैशनेबल रूप देने के लिए निम्न सिद्धांतों को अपनाया गया है।
फैशन के तीन सिद्धांत अथवा थ्योरी
ट्रिकल डाउन थ्योरी
यह सिद्धांत सदियों से चली आ रही है।यह सिद्धांत समाज के सभी लोगों द्वारा सबसे ज्यादा स्वीकार किया जाता है। बाकी सिद्धांतों के अपेक्षा इस सिद्धांत को लोगों द्वारा सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है। इसमें फैशन डिजाइनर द्वारा किसी ऐसे ड्रेस की संरचना होती है।जिसको अधिक लागत देकर तैयार किया गया हो।उस ड्रेस को इस सिद्धांत के अनुसार उच्च वर्ग के लोग इस फैशन शैली को अपनाते हैं उसके बाद धीरे-धीरे हैं वह शैली मध्यम वर्ग के लोगों द्वारा स्वीकार किया जाता हैं। फिर साधारण लोग इसे अपने जीवन में शामिल करते हैं।
"जो फैशन उच्च वर्ग के लोगों से होते हुए निम्न वर्ग के लोगों तक इस फैशन को अनुसरण किया जाता है, उसे ट्रिकल डाउन थ्योरी कहते हैं।"
ट्रिकल अप थ्योरी
इस सिद्धांत में परिवर्तन नीचे से ऊपर की ओर होता है अर्थात यह सिद्धांत निम्न वर्ग से उच्च वर्ग को जाता है। सड़कों और गलियों में भटकने वाले गरीब लोगों द्वारा पहने जाने वाले वस्त्रों को फैशन डिजाइनर विचार-विमर्श करके कलात्मक तरीकों से आरामदायक और स्टाइलिश बनाते हैं जिन्हें उच्च वर्ग के लोग स्वीकार करते हैं। तब से यह फैशन का रूप ले लेता है। जैसे कि निम्न वर्ग के लोगों के जींस और जैकेट ज्यादा दिनों तक पहनने की वजह से फट जाते हैं। फैशन डिजाइनर उन कपड़ों रचनात्मक तरीके से नया रूप प्रदान करती है जिसे उच्च वर्ग के लोग अपने जीवन शैली में अपनाते हैं।
ट्रिकल अक्रोस थ्योरी
ट्रिकल अक्रोस थ्योरी हर वर्ग में समान रहता है अर्थात बिलकुल एक जैसा होता है। क्योंकि इस थ्योरी में फैशन डिजाइनर द्वारा बनाए गए कोई भी ड्रेस उच्च व निम्न वर्ग के कोई भी व्यक्ति तुरंत कॉपी कर लेते हैं। इसे हॉरिजॉन्टल फ्लोर थ्योरी भी कहते हैं।इस थ्योरी को एक ही समय पर हर वर्ग का व्यक्ति फैशन ट्रेंडिंग ड्रेस को अनुसरण करता है, उसे पहनता है।आज के समय में इस सिद्धांत को अनुसरण करना बहुत आसान हो गया है। क्योंकि एक ही समय पर वह ड्रेस हर किसी को अपने बजट के अनुसार मिल जाता है। इसीलिए लोग बहुत आसानी से इसे कॉपी कर लेते हैं।
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