दुल्हन के श्रृंगार से जुड़ी महत्वपूर्ण वस्तुएँ
शादी का दिन किसी भी दुल्हन का सबसे विशेष दिन होता है और इस दिन हर दुल्हन का हक होता है कि वह सबसे विशेष दिखे इसीलिए गहनों की बिना उनकी सुंदरता में चार चांद लगना असंभव है हर लड़की का सपना होता है कि वह अपने शादी पर सबसे ज्यादा खूबसूरत लगे इसीलिए उसके गहनों पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
दुल्हन का गाना उसके आभूषण उसकी संस्कृति और सभ्यता का प्रतीक होता है हर राज्य और अलग-अलग देशों में दुल्हन अलग अलग तरीके से तैयार होती हैं विभिन्न प्रकार के आभूषण पहनती हैं इससे या अनुमान लगाया जा सकता है कि वह किस देश व राज्य की है।
हर लड़की का सपना होता है कि वह अपने साथी पर जब दुल्हन बने तो सबसे ज्यादा खूबसूरत लगे।इस दिन का उसे बहुत बेसब्री से इंतजार होता है क्योंकि यह दिन जिंदगी में सिर्फ एक बार आता है और दुल्हन का पूरा हक होता है कि वह अपने मर्जी से सजे खुद को सवारे। उसने पहले से ही बहुत कुछ सोच कर रखा होता है कैसे आभूषण पहने की कैसे कपड़े बनेगी कौन से कलर के होंगे आदि।
दुल्हन के माता पिता अपने घर के परंपरा और रीति-रिवाज को ध्यान में रखते हुए अपनी बेटी की हर दिली ख्वाहिश को पूरा करते हैं उसे हर वह चीज दिया जाता है जो उसे चाहिए होता है ताकि वह खुश रहे और हंसी खुशी अपनी पूरी जिंदगी व्यतीत करें। विवाह के बाद दुल्हन को ढेर सारी दुआओं और आशीर्वाद देकर विदा किया जाता है ताकि वह अपना पूरा जीवन हंसी खुशी अपने ससुराल में व्यतीत करें।
तो चलिए जानते हैं कि हर लड़की को दुल्हन का रूप देने वाली कौन-कौन सी चीजें हैं। जो उसे खूबसूरत दुल्हन बनाने में सहायक होती हैं और इनमें से अगर एक भी चीज़ की कमी हुई तो दुल्हन का श्रृंगार अधूरा रह जाता है।
दुल्हन के प्रमुख आभूषण
1.सगाई की अंगूठी
शादी से पहले सगाई की एक रस्म होती है जिसमें पूरे रस्मों रिवाजों के साथ लड़का और लड़की दोनों एक दूसरे को अंगूठी पहनाते हैं और एक-दूसरे का मुंह मीठा करवाते हैं।कहा जाता है कि अंगूठी बाऐ हाथ की सबसे छोटी उंगली के बगल वाली उंगली में पहनानी चाहिए क्योंकि इस उंगली का कनेक्शन सीधा दिल से होता है।इससे उनका एक रिश्ता जुड़ जाता है।ये अंगूठी उनके रिश्ते की पहली निशानी होती है।
2.माथे का मांगटीका
यह प्राचीनकाल से ही दुल्हने पहनती हैं फर्क सिर्फ इतना है कि अब इसके डिज़ाइन और आकार में बदलाव आ गया है।इसे लगाने से चेहरा को अलग लुक मिलता है।मांगटीका के बिना माथा सुना लगता है।इसे लगाने से माथे से शोभा बढ़ जाती है।अपने आभूषण अथवा ऑउटफिट से मिलता जुलता मांगटीका अच्छा लगता है अगर ज्वेलरी के सेट का मांगटीका लगा रहे है तो यह अलग ही शोभा देता है।
3.माथे का झूमर
ये माथे पर बाई ओर लगकर बालो में फसाया जाता है। जाता है मुख्यतौर पर इस्लामिक दुल्हने इसे पहनती हैं।इस सोने व चांदी से निर्मित झूमर पर नक्सशी बनी होती है।जो दुल्हन को अद्भुत लुक देती है।
4.कान का झुमका
झुमके का डिजाइन दिन प्रतिदिन ट्रेडिशनल होता जा रहा है। हर दुल्हन अपने कपड़े या आपने आभूषण से मैच करता हुआ जिम का पहनना ज्यादा पसंद करती है यह झुमका शादी में सबके ध्यान को आकर्षित करता है यह थोड़े भारी होते हैं इनको कैरी करना थोड़ा मुश्किल होता है। हर दुल्हन ऐसे चमके पहनना चाहती हैं जो फैशन के लेटेस्ट ट्रेंड में हो जो उसके हैं रंग रुप कपड़ों की हिसाब से उस पर बेहद खूबसूरत लगे यह झुमके दुल्हन के कानों की शोभा बना बढ़ाने में सहायक होते हैं।
5.नेकलेस(गले का हार)
पुराने समय मे दुल्हने भारी भरकम हर पहनती थी परंतु वैसा हर आज की दुल्हन को पहनना मुश्किल है। हर दुल्हन ऐसा सेट पहनना चाहती हैं जो उनके ड्रेस से मैच करता हो, देखने में खूबसूरत लगे और जिसमें वह कम्फ़र्टेबल है।जैसा कि हम जानते हैं हर दुल्हन की पसंद अलग होती है किसी को डायमंड पसंद होता है, किसी को सोने का सेट तो कोई आर्टिफिशियल ज्वेलरी पहनना पसंद होता है। वह लेटेस्ट डिज़ाइनो की खोज में लगी रहती है।यह उनके सुने गले को भर कर उन्हें दुल्हन वाला लुक देती है।
6.हाथ की चूड़ियाँ
हर दुल्हन अपनी शादी पर लाल रंग की चूड़ियों से अपने हाथों को भरे रहती हैं यह सुहाग की निशानी भी होती है और वैसे तो हर लड़की को चूड़ी पहनना पसंद होता ही है चौड़े चौड़ें कंगन में हीरो को जड़कर उनपर कुंदन वर्क वाले कंगन के बीच में लाल रंग की कांच की चूड़ियों को लगाकर पहनती हैं परंतु आजकल की मॉडर्न दुल्हनें चूड़ी की जगह चूड़ा को ज्यादा महत्व दे रही हैं हर दुल्हन अपने ड्रेस से मैचिंग चूड़ा को पहन रही हैं। बंगाल की दुल्हनिया प्रमुख रूप से शंख कोरल लोहे से बनी चूड़ियों का महत्व देती हैं।
7.हाथो में रची मेंहंदी
शादी के पहले मेहंदी की भी एक रस्म होती है।यह प्रथा सदियों से चली आ रही है।जिसमे दुल्हन के हाथों और पैरों में भरवा डिज़ाइन की मेहंदी लगाई जाती है।आजकल की दुल्हने अपने मन पसंद की नई नई डिज़ाइन हाथों में लगवाती हैं।कहते हैं दुल्हन के हाथों में जितनी गाढ़ी मेहंदी रचती है उसका पति उससे उतना अधिक प्रेम करता है।
8.बाजू में पहनने वाला बाजूबंद
इसे दुल्हन अपने बाजू पर पहनती है।इसका आकार चौड़ा कंगन की तरह डिज़ाइनदार होता है।उह सोने व चांदी से बने होते हैं इसे दुल्हने अपनी शादी पर या किसी विशेष अवसरों पर पहनती है।जबकि प्राचीनकाल में ओस बाजूबन्द को दूल्हने अपनी शादी से लेकर हर समय पहेने रहती थी परंतु आजकल की मॉडर्न दुल्हन इसे हर वक़्त कैर्री नही कर सकती।
9.पैरो की पायल
पुराने समय मे हर दुल्हन अपने पैरों में छागल पहनती थी जो बहुत हैवी 250 ग्राम,500 ग्राम तक का होता था परंतु अब ऐसा नही है हर दुल्हन छागल की जगह पायल पहनती है।यह चांदी की बनी चौड़े पटटे की तरह होती है।इसमे घुंगरू भी लगे होते हैं इसे पहन कर चलने से छम छम की आवाज़ अती है इसकी मधुर आवाज से पूरा घर गूंज उठाता है।इसमे कई डिज़ाइन पायी जाती है।जो दुल्हन अपनी पसंद व कम्फर्ट के हिसाब से पहनती हैं।अब इसमें भी कई प्रकार मौजूद हैं जैसे आर्ट वर्क,हैवी कूदन आदि।
10.पैर की उंगली में पहना जाने वाला बिछिया
यह भी पायल की तरह चांदी की बनी होती है।जैसे हाथ की उंगलियों में अंगूठी पहनी जाती है ठीक वैसे ही पैरो की उंगलियों में इसे पहना जाता है।दुल्हन विवाह के पश्चात भी इसे पहनती हैं।

11.कमर की शोभा बढ़ाने वाला कमरबंद
इसे दुल्हन अपनी कमर पर पहनती हैं।जिसमे एक चाबियों का गुच्छा लगा होता है।यह कमरबन्द उसे घर की मालकिन होने और घर की जिम्मेदारियों का हर समय आभास दिलाता है।आज कल की दुल्हने ऐसे कमरबन्द का चुनाव करती है जिस पर लेटेस्ट डिज़ाइन वर्क हो या फिर जो उनके ज्वेलरी से मैच करता हो।
12.नाक की नोज रिंग(नथ अथवा नथिया)
ये चूड़ी के आकार का गोल सा डिज़ाइनदार होता है जिसमे एक लंबी चेन लगे होती है।नथ को नाक में पहन कर उस चैन को बल में फसाया जाता है।इसे नाक के बायीं तरफ पहना जाता है जो दुल्हन को ओर अधिक खूबसूरत बना देती है।महाराष्ट्र में दुल्हने काजू के आकार का नोज रिंग पहनती हैं।और शादी के बाद नाक में कील या फिर बहुत छोटी से रिंग की तरह नथ पहनती हैं।जो उनको सबसे अलग प्रस्तूत करता है।
13.वाराणसी की मशहूर बनारसी साड़ी
यह साड़ी वाराणसी में बनती है इसे मशीन व हाथ दोनो से निर्मित किया जाता है।बनारसी साड़ी भारत में बहूत प्रसिद्ध है।उसे सोने व चांदी की जारी,उम्दा रेशम और बेहतरीन कढ़ाई करके बनाया जाता है।इसके बहुत सारे रंग व डिज़ाइन होते है।बंगाली दुल्हनो के अलावा हर कोई इसे बड़े शौक से पहनती हैं।जो सभी प्रकार की साड़ियों से खूबसूरत लगती है।
14.विवाह में पहना जाने वाला दुल्हन का लाल जोड़ा
हर दुल्हन अपनी शादी पर लाल जोड़ा पहनती है।फिर चाहे वो सूट हो,लहँगा हो या फिर लाल साड़ी।लाल रंग शुभ होता है और प्रेम का प्रतीक भी होता है।आजकल लाल रंगों के साथ अन्य कई रंग देखने को मिलते हैं।जो डिज़ाइनर द्वारा डिज़ाइन किये हुए काफी सुन्दर होते है।
15.दुल्हन के रेशमी बालो में गजरा
दुल्हन के बालों में गाजर लगाना मतलब उसकी बालो में चाँद लगा देना।अक्सर दुल्हनें अपनी हेयर स्टाइल के अनुसार अपने बालों में गाजर लगती है।इसकी खुसबू से वो अपने पति को मोहित करती है।गजरे के जगह बहुत सी दुल्हन बन बनाकर उसके चारों तरह गुलाब के फूलो से सजती है।महाराष्ट्र की दुल्हने जुड़ा बना कर जुड़े पर अंबाडा पिन लगा कर उसे और खुबसूरत बनाती है।
16.हाथ पांव में लगाया जाने वाला अल्टा
प्राचीनकाल में दुल्हन को मेहंदी की जगह उसके हाथों और पैरों में अल्टा लगाया जाता था।यह लाल रक्त के रंग का होता है।इसे लगाने आसान है लगाने के बाद इसे सुखने में भी ज्यादा समय नही लगता और यह मेहंदी अपेक्षा ज्यादा समय तक हाथों पर लगा रहता है।
17.माथे की बिंदिया
बिंदी अथवा कुमकुम को हर दुल्हन अपने माथे के बीच मे लगाती है।यह लाल रंग की बिंदी एक ऐसी चीज़ है जो दुल्हन के रूप को अनोखा बना देता है।इसीलिए बंगाल की अधिकतर दुल्हने बिंदी के साथ चंदन से कई तरह की डिज़ाइन बनाकर अपने आप को सर्वश्रेष्ठ लुक देती है।आजकल बाज़ारो में एक से बढ़कर एक डिज़ाइन के स्टिकर्स वाले बिंदी चलन में जिससे हर कोई लगाना पसन्द भी करता है।
18.हाथ का छप्पा
हाथ का छापा दुल्हन के हथेली के पीछे वाले हिस्से को सुसज्जित सुसज्जित करने का काम करता है इसमें पांचों उंगलियों की अंगूठी एक लंबी चैन से होती हुई कलाई तक जाती है। इसे दोनों हाथों में पहना जाता है।इसमें बहुत सारी डिजाइन आते हैं और कुछ लोग अपने पसंदीदा डिजाइन ऑर्डर करके बनवाते हैं।
19.सुहागन के सिर का ताज- सिंदूर
शादी के बाद हर विवाहित नारी अपने मांग में सिंदूर भरती है। उसके सुहाग की निशानी होती है और कहते हैं कि सिंदूर को माथे से लेकर मांग में जितना लंबा लगाया जाए पति की उम्र इतनी लंबी होती है। सिंदूर नारंगी रंग का होता है परंतु आजकल की महिलाएं लाल रंग को ज्यादा महत्व दे रही है।
20.सुहाग की निशानी मंगलसूत्र
सिंदूर और मंगलसूत्र हर शादीशुदा नारी की पहचान होती है यह हर विवाहित लड़की का प्रमुख गहना होता है इसे वह शादी के बाद हमेशा अपने गले में पहनती हैं काले और गोल्डेन मोतियों को धागों में पिरो माला की तरह बनाया जाता है और बीच में एक लॉकेट लगी होती है। जो हर विवाहित औरत के गले की शोभा होती है।
आज के समय में हर दुल्हन अपनी शादी कि हर रसम पुराने रीति-रिवाजों के साथ ट्रेडिशनल तरीके से मनाती है। जिसने वह अपने मेकउप और कपड़ों से लेकर आभूषण तक की छोटी सी छोटी हर एक चीज को बहुत सोच विचार कर बिन लापरवाही किये चयन करती है। क्योंकि शादी वाले दिन हर किसी की नजर सिर्फ और सिर्फ दुल्हन पर टिकी रहती है हर कोई बेताब रहता है उसे देखने के लिए।आर्टिफिशयल गहनों में कुंडल और क्रिस्टल का मेक।दुल्हन का पूरा लुक उसके सभ्यता और सांस्कृति का प्रतीक होता है।
नई दुल्हन घर की लक्ष्मी होती है और अपने साथ घर में ढेर सारी खुशियां लेकर आती है।शादी के बाद हर विवाहित नारी को पूरी साज़-श्रृंगार के साथ रहना होता है।सिर से लेकर पैर तक सुहाग की हर निशानी को पहनना होता है। नई नवेली दुल्हन का हाथ,पैर,गला,मांग,नाक कभी सुना नहीं होना चाहिए यह अशुभ माना जाता है।श्रृंगार करने से ससुराल में उसका सम्मान,सत्कार और गौरव बना रहता है।
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