भारत के परंपरागत आभूषणों की विभिन्नताओं की विशेषताएं

 भारत देश काला का भंडार है।जिसमे अनेक कलात्मक चीज़े प्राचीन से अब तक देखने को मिलती है।प्राचीन काल से स्वर्ण आभूषण का कारोबार भारत में होता आ रहा है। सोने,चांदी,मोती,कुंदन और मूल्यवान पत्थरों आदि के लिए भारत देश आज भी प्रमुख है। भारत देश पर अनेक शासकों ने राज्य किया है और उन्हीं शासकों ने भारतीय आभूषण को अधिकाधिक परिश्रम से उन्हें सुसज्जित करके उन्हें सवारा रखा था। भारत के आभूषणों की विविधता रचना विभिन्नता और उसके निर्माण में दुनिया भर के सभी क्रेता विक्रेता का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर रखा था। यहां एक बच्चे से लेकर बड़े-बूढ़े तक हर कोई अपनी सभ्यता और संस्कृति को ध्यान में रखकर आभूषण पहनता अथवा खरीदता हैं। बस यही नहीं मंदिर में भगवान की मूर्ति को सजाने के लिए इन्हीं आभूषणों का उपयोग किया जाता है।

भारतीय आभूषण भारत की संस्कृति, परंपरा और उसकी सभ्यता का प्रतीक है। जो भारत में आज भी जीवित है इसका श्रेया भारत की महिलाओं को जाता है जिन्होंने भारत के हर आभूषण को धारण करके खुद को तो खूबसूरत बनाया ही साथ में उन परंपरागत आभूषणों को भी नया रूप प्रदान किया है। बदलते समय के साथ साथ सब कुछ बदल कर नवीन फैशन के अंतर्गत आ चुका है। शरीर के हर अंग पर धारण करने वाला हर आभूषण बदलकर फैशन के नए प्रवृत्तियों में आ रहा है। आभूषण बनाने वाले एक धातु में दूसरे धातु को मिलाकर नए आभूषण को तैयार किया जा रहा है जिसे लोग काफी पसंद कर रहे हैं जैसे चांदी पर सोना चढ़ा कर, सोने में डायमंड जड़ित आभूषण,आर्टिफिशियल में कुंदन,क्रिस्टल का सेट और मूल्यवान पत्थरों के आभूषण की जगह लोग धातु से बने आभूषण धारण कर रहे हैं।फैशन ने भारतीय परंपरागत आभूषण को नया रूप दिया है। चलिए जानते हैं भारत के परंपरागत आभूषणों की विभिन्नताएं_

भारत के परंपरागत आभूषणों की विभिन्नताएं

प्राचीनकाल का आभूषण
भारतीय आभूषण सदियों पुराना है। प्राचीन काल में सोने के ताबीज,माला, सिक्के, झुमके, मुद्राएं आदि का निर्माण भारत देश में ही किया जाता था। इसमें अलग अलग राज्य के कारीगरों द्वारा राजा रानी के प्रत्येक आभूषण कला-कौशल व कलात्मक तरीकों से तैयार किए जाते थे।जो सदियों तक लोगो को याद रहे।इनकी डिज़ाइन सूक्ष्म व कृतिम होती थी।जो अपने आप में एक अनोखेपन को दर्शाता था।हालांकि उस समय तैयार किए गए आभूषण की आकृति वाले उसकी डिजाइन हर स्थान पर मशहूर तो थे ही।आज भी इनका विशेष स्थान है। जो हर कोई देखने के लिए उत्सुक रहता है।अब इन्हें विभिन्न म्यूजियम में देखा जा सकता है।

हाथो से निर्मित आभूषण
प्राचीन काल में भारत में एक से बढ़कर एक कुशल कारीगर अथवा प्रसिद्ध सुनार हाथ से आभूषण बनाने में सक्षम होते थे। जो धातु को पिघला कर विभिन्न प्रकार की कृतिम आकृति और डिजाइन देकर भिन्न प्रकार के आभूषण तैयार करते थे।जिसे राजघराने के लोग धारण करते रहे।
परंतु आधुनिक समय मे आभूषण मशीनों व यंत्रो द्वारा निर्मित किये जाते हैं।जिसकी अनगिनत डिज़ाइन को कंप्यूटर द्वारा तैयार किया जाता है।

देवी-देवताओ के आभूषण
भारत मे हिन्दू धर्म के देवी-देवताओं की मूर्तियां पारंपरिक बहुमूल्य आभूषण द्वारा सजाया जाता था।इन आभूषणो को सोने में रत्नों को जड़वाया जाता था।इसमे प्रमुख रूप से हाथ की चुडिया,कान के झूमके, नाक की नथ,गले का हार,कमर में कमरबंद,पैरों के पायल,हाथ के बाजू के बाजूबंद आदि।
अब कोई भी सोने,चांदी से बने आभूषण मंदिर के देवीदेवताओं को नही चढ़ाता।इनसे मिलती जुलती आभूषणों द्वारा नाट्य स्थल में नात्याभिनेय,मूर्तियों को सजाने का कार्य किया जाता है। भारतीय महिलाएं इन आभूषणों को नया रूप देकर इनका प्रयोग अपने दैनिक जीवन शैली में करती हैं।

पत्थर के बने आभूषण
प्राचीनकाल में मूल्यवान पत्थरों को आभूषण में जड़वाया जाता था।जिससे उनकी शोभा में चार चांद लगे।स्त्री और पुरुष सौंदर्य के अलावा अपने ग्रह के अनुसार इसे पहनते थे।
इसका उपयोग आज भी उसी के ऊपर होता है लोग खुश रहने के लिए अपने जीवन में बदलाव के लिए ऐसे बहुत से काम है जिसके लिए अपने गहनों में पत्थर का उपयोग करते हैं और इसे पहनते हैं गले में लॉकेट बनाकर उंगली में अंगूठी कलाई में पत्थर जोड़ीत ब्रेसलेट के रूप में दी से पहनते हैं।

सोने व चांदी का आभूषण
प्राचीन समय में स्त्री और पुरुष स्त्री व पुरुष के स्त्री व पुरुष के सभी गहने सोने व चांदी के बनते थे। आभूषण के अलावा सोने और चांदी का प्रयोग सिक्के और मुद्राएं बनाने में किया जाता था। इतना ही नहीं राज महल मैं सजाने वाली अनेक वस्तुओं का निर्माण सोने व चांदी से किया जाता था।
समय के साथ इसका महत्व आज भी उतना ही है जितना पहले था।सोना व चांदी से बने आभूषण पहनना सबको पसंद होता है। मुख्य रूप से स्त्रियों को। यह ऐसा धातु है जिसे पहनना शुभ होता है।यह सबको पसन्द होता है तथा शुभ अवसर पर इसे पहना भी जाता है।

नौरत्न आभूषण
नवरत्न आभूषण को अधिक महत्व दिया जाता है।रत्न का अर्थ होता है बहुत कीमती पत्थर।अपने नाम की तरह यह नौ रत्नों से मिलकर बना होता है। यह आभूषण पहनने वाला मनुष्य दुर्भाग्य से बचा रहता है लोग इसे अपने आभूषण में इसके रत्नों को सेट करवा कर उस आभूषण को पहनते हैं। इसे विभिन्न निषेधात्मक चीजों से उनकी सुरक्षा होती है।
आज भी लोग अपने फैशनेबल डिजाइन की हुई ज्वेलरी में इन रत्नों को विशेष रुप से बनवाते हैं और शादी विवाह जैसे अवसरों पर इसे पहनते हैं कुछ लोग अपने रोज की दिनचर्या में ताबीज अंगूठी आदि बनाकर इसे पहनते हैं।
मीनाकारी के आभूषण
यह आभूषण कुशल कारीगरों द्वारा बनवाया जाता था।मिनाकारी कुंदन के आभूषणों की विशिष्टाता है।।इसमे बहुमूल्य पत्थर सोने में बहुत खूबसूरती के जड़ित होते थे।इसका कार्य भारत के विभिन्न केन्द्रस्थल में किया जाता है।जिसमें जयपुर प्रमुख है। इस आभूषण में मीना के साथ कुंदन के अलावा कई और रत्न जड़े होते हैं जिसकी शोभा बढ़ाते हैं।
आधुनिक समय में स्त्रियों के श्रृंगार के विभिन्न आभूषण को इसीसे बनाया जाता है इसमें आश्चर्यजनक रंग व डिजाइन मौजूद होते हैंइसके अलावा घर की गृह सज्जा की वस्तुएं तथा खूबसूरत बर्तन आदि में भी मीनाकारी का उपयोग किया जाता है।

लाख के आभूषण
इसका आरंभ राजस्थान से हुआ था। प्राचीन काल की राज्य वंशी रानियां और राजकुमारियां लाख के बने गए हैं से अपना सिंगार संपूर्ण करती थी या हाथ से बनी बेहद खूबसूरत डिजाइन की होती थी।इसकी डिज़ाइन में विभिन्नता और सुंदरता के कारण यह पूरे भारत मे प्रसिद्ध है। जिससे इसकी मांग का महत्व आज भी बरकरार है। इस आभूषण का उपयोग विशेष तौर पर दुल्हन के आभूषण बनाने में किया जाता है। वैसे तो हर कोई अपनी छोटी बड़ी चीज होने इसी का उपयोग करता है परंतु ज्यादातर लाख की चूड़ियां प्रसिद्ध है।

कुंदन के आभूषण
कुंदन का अर्थ है शुद्ध सोना।लाख के आभूषण की तरह यह भी राजस्थान से आरंभ हो कर धीरे धीरे पूरे भारत मे इसकी कारीगरी को महत्वत्ता मिलने लगी।देश के प्रत्येक क्षेत्र में इसे पसंद किया जाने लगा। परंतु जयपुर इसका केंद्रित शहर है।
आधुनिक कुंदन के सेट में आप नीलम, हीरे वह मोती आदि अन्य रत्नों को बहुत आकर्षक तरीको से सेट किया जाता है। कुंदन के आभूषण में अन्य रत्नों की जगह कांच के टुकड़ों का उपयोग भी करने लगे हैं।


हाथी दांत के आभूषण
यह आभूषण हाथी के दांत के आलावा ऊँट, भैंस व अन्य जानवर के हड्डियों से बने होते हैं।इसके कारीगर अलग अलग जगह पर घर बसा कर अपना कारोबार शुरू किया इससे यह कला भारत के हर क्षेत्र में फैलता गया।इससे सजावटी सामान और उसपर कृतिम नक्काशी बनाते थे।नर-नारी के विभिन्न प्रकार के आभूषण भी इससे तैयार किये जाते थे।पर इसे गुजरात ने भी महत्व दिया है यहाँ दुल्हन की चूड़ियां बनाई जाती है जोकि प्रसिद्ध है।इसकी मांग आज भी विदेशो में है।जिससे इसकी कीमत करोड़ो अरबो में है।

मनका आभूषण
सिंधु घाटी को सभ्यता से प्रचलित इस आभूषण से लोग चीजो को सन्दर्य व बहुमूल्य बनाते थे।मनका का अर्थ होता है मणिका।इसे धागे में पिरोकर माला,कपड़ो के झालर व अन्य बहुत सी वस्तुओ पर मनकारी किया जाता था।जो आज भी आभूषणों से लेकर सजावटी सामानों पर मन्कारी किया जाता है।

जिस तरह प्राचीन काल में लोगों को अपना हर अंग जेवरों से सजाना पसन्द था ठीक वैसे ही आज भी लोग आभूषण पहनना पसंद करते हैं।फर्क सिर्फ इतना है कि पहले के आभूषण की अपेक्षा लोग अब अपने आभूषण के आकार,रूप,आकृति में परिवर्तन कर चुके हैं।हालांकि परिवर्तन जीवन का नियम है जिस तरह मनुष्य अपने जीवन के हर क्षेत्र में परिवर्तन कररहा है वैसे ही आभूषण में भी बदलाव ला रहा है।इसमें विशेष तौर पर उसकी डिज़ाइन फ़ैशनेबल होती जा रही है।क्योंकि आधुनिक समय मे कोई भी पुराने जेवर नही पहनना चाहता।पुराने जेवर की मांग सिफ उनको पिघला कर नया रूप देने तक ही सीमित है।परन्तु इसकी मांग असिमित है।
दोस्तों आपको मेरा आर्टिकल कैसा लगा कमेंट करके जरूर बताइएगा और हिंदी में इसका आर्टिकल को पढ़ने के लिए सर प्लीज सब्सक्राइब कर दीजिए और शेयर भी कीजिएगा अगर आपको मेरा आर्टिकल पसंद आया हो तो लाइक करे।

Comments

Popular posts from this blog

कपड़े की डिजाइन में रंगों का क्या महत्व है?

क्यों जरूरी होता है त्वचा के रंग के अनुसार ही कपड़ों के रंग का चयन करना?

वर्तमान समय मे मानव जीवन पर फैशन का दुष्प्रभाव